रोज..
डार्लिंग! रोज-रोज रोजी को रोज मंगता!
दिल-विल छोड़ो, लाल-लाल गुलाब मंगता।
यारा! दिलदारा! तेरी बाहों का हार मंगता,
होठों की छुअन, नशीला मय का जाम मंगता!

स्वरचित तथा मौलिक 
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • मनमोहक शब्दों से बयाँ करते सुन्दर ! बधाई