2 1 2877 2 2877 रोला छंद प्यारा मेरा गांव, महक सौंधी मिट्टी की।आतुर व्याकुल नैन, राह तकते चिट्ठी की।।बने शहर अब गांव, ठांव है अपनेपन की।बदलो रहकर साथ, भाग्य रेखा जीवन की।।स्वरचित मौलिक रचनाचंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared22 Nov 2025 Start 22 Nov 2025 End 22 Nov 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Intranetuser Demo 25-Feb-2026 Comment Like बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बधाई! रोला छंद © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें