2 3 5582 2 5582 बैसाखी! "बैसाखी की लख लख बधाइयाँ "ऋतु वसंत मंगल है गाएं, गीत खुशी के आज।आनन पर सखि देखो छाया, तेजस अदभुत साज।।हर्षित धरा-गगन मिल करतें, रिद्धि-सिद्धि के काज।नित नव उड़ान भरने आतुर, पंछी विरला बाज।। Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared13 Apr 2025 Start 12 Apr 2025 End 12 Apr 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Ashish Jain 28-Oct-2025 Comment Like बहुत सुन्दर रचना Vibha Jain 01-Nov-2025 Comment Like वाह खूब! ❤️🙏❤️🙏❤️🙏❤️ Intranetuser Demo 27-Apr-2026 Comment Like बधाई हो! बैसाखी! © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें