बैसाखी!

"बैसाखी की लख लख बधाइयाँ "

ऋतु वसंत मंगल है गाएं, गीत खुशी के आज।
आनन पर सखि देखो छाया, तेजस अदभुत साज।।
हर्षित धरा-गगन मिल करतें, रिद्धि-सिद्धि के काज।
नित नव उड़ान भरने आतुर, पंछी विरला बाज।।

इस पर लोग क्या कह रहे हैं