उत्सव का आनन्द है, देख आगमन आज है।
गणपति आए अंगना, पूजन-अर्चन काज है।।
मंदिर सज-धज है खड़ा, बप्पा की मनुहार है।
दृष्टि पड़े जब देव की, समता अपरम्पार है।।
गणनायक की साधना, सन्मति दाता कामना।
लीला लहर गणेश जी, सुनते सबकी याचना।।
गजमुख हे लम्बोदरा, संकट मोचक देवता।
मोदक, लड्डू भोग दो, कब गणेश मुख फेरता।।
लिपि में कर जय संहिता, खोले गणेश पाश है।
जग कल्याणक भाव से, करता रिपु दल नाश है।।
मात-पितांम प्रदक्षिणा, भोले नाथ प्रियंवदा।
महादेव सुत लाडला, वंदनीय जग को सदा।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई।