"इंसान"

"इंसान"
कौन हैं ये !!!
कोई जनता हैं क्या इसको !!!
किसे कुछ पता मालुम हैं क्या इसका !!!
अरे भाई इंसान ढूंढ रहा हु !!!
कोई कुछ बताता नहीं !!!
कोई कुछ पूछता नहीं !!!!!!!
कही यह जाती विलुप्त तो नहीं हो गयी !!!!
अरे भाई !!!!
अब लगता हैं किसी बड़े जंतुआलय जाना पड़ेगा शायद वह मिल जाए !!!
बाबू लाल !!!
थका हारा !!!!कांकरीया पंहुचा !!!
शेर मिला !!! इंसान जैसी सूरत मूरत का बन्दर मिला !!!!
बस इंसान ना मिला !!!!
पता हैं मैं उदास क्यों हु !!!!!
इसीलिए की इंसान न मिला !!!!!
आज के इस बदलते युग मैं क्या कोई इतनी जल्दी भी विलुप्त होता हैं !!!
क्या कोई इतनी जल्दी भी खोता हैं !!!
नहीं नहीं !!!!
पता नहीं ये किसी मुसीबत ाँ पड़ी आज इंसान ढूंढ़ने की !!!!
अरे भाई हिरा बोल देते !!!! पन्ना बोल देते !!!
पर अब इंसान कैसे धुंडु !!!!
अरे भाई भगवान ही बोल देते !!!!!
पर है राम !!! इंसान कहा से लाउ अब !!!!
दिन भर थका हारा !!!! जब मैं गांव पंहुचा !!!! तो भी तो मिटटी ही मिली !!!!
पर इंसान कहा था !!!!!
जब थक हार के !!!!! अपनी हार स्वीकार कर !!!!
सोचा !!! अब थोड़ा भोजन कर लिया जाए !!!!
तब  नाहा धो कर !!! आईने मैं खोज कर खुद के अंदर देखा !!!
तब थोड़ा सा इंसान दिखा !!!!
बाकी सब तो बेच चूका था मैं बाज़ार मैं !!!!
जहा बोली उस हर चीज़ की थी जो बिकती थी !!!
थोड़ा मैं खुद भी बिक गया !!!!
पर इंसान नहीं मिला अब भी !!!!
इश्क़ - दया ये सब किधर था अब !!!
हम सब तो काम क्रोध सब मैं लिपटे हुए थे !!!!
कलयुग जो हैं !!!!
तिजोरी भी तो भरनी हैं !!!!
अब चाहे वो किसी इंसान की मौत के बदले भरी जाए !!!!
कल जब निकलोगे बाज़ार मैं तब गबराना मत !!!!
क्युकी मुर्दो की इस बाज़ार मैं अब इंसान कहा मिलेगा !!!


द्वारा Yatharth Puri
Shared20 Jan 2026
Start 19 Jan 2026
End 19 Jan 2031
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