4 3 6670 4 6670 बारिश की बूंदें रुमझुम बूंदें झर रही, गाती मीठा गीत।मन धरती का मचलता, पाकर प्रभु की प्रीत।।पाकर प्रभु की प्रीत, सजायी पुष्पित क्यारी।गगरी में भर प्यार, रंग भर ली पिचकारी।।सुंदर मनहर धूप, मोहिनी बांधे फूंदें।बादल, बिजली, मेघ, आयेगी रुमझुम बूंदें।। Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared09 Jan 2025 Start 09 Jan 2025 End 09 Jan 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Sachin Jain 04-Jul-2025 Comment Like आप से जुड़ कर, कविता पढ़ कर बहुत अच्छा लगा!🙏❤️🙏❤️🙏 Sundeep Jain 24-Dec-2025 Comment Like बहुत ही सराहनीय है। इसे पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई Manish Jain 28-Jan-2026 Comment Like वाह वाह! बहुत खूब! सुन्दर प्रस्तुति! बारिश की बूंदें © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें