प्यारा भारत देश....
भाल पे चन्दन तिलक सी, हिमालय की उत्तुंग चोटियाँ !!   
हिम आच्छादित, शुभ्र धवल, गगनचुम्बी पर्वत श्रृंखला !
शिव जटा मे सुशोभित, नागीन सी भगीरथ क़ी प्रिय गंगा!
कल कल बहती, सागर को मिलती ब्रम्हपुत्र, यमुना, गंगा !
 
दाए बंगाल की विशाल खाड़ी, बाए मचलता अरब सागर,  
विवेकानंद की कन्याकुमारी, कदम पखेरता  हिंद सागर !
पश्चिम की दीवार सहयाद्रि, वनसंपदा से परिपूर्ण अरावली, 
कहीं थार का रेगीस्तान, कहीं सोना उगलती अवनि वाली   !
 
कहीं अरदास, अजान, कहीं प्रार्थना, स्तवन न्यारे 
कहीं  कुरान, गुरुवाणी, कहीं गीता, बायबल, जिनवाणी!
कहीं मन्दिर, मज्जिद, गिरिजाघर, गुरूद्वारे, अग्यारी 
कहीं राम, रहींम, कृष्ण, येशु, पंचप्यारे, जिनेद्र, गिरिधारी ! 
 
खानपान, रीतिरिवाज, भाषा, पहनावा, वेशभूषा, रूप, रंग, 
धर्म, जाती, पंथ, प्रान्त, प्रकाश किरणों के इंद्रधनुषी सप्तरंग !
होली, दीवाली, ईद,बैसाखी, पोंगल, बिहू, छट, तीज़, त्योंहार,
भिन्न भिन्न व्रत, उत्सव, परम्पराएँ, आस्था के अनुपम द्वार !
 
राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, नानक, जगन्नाथ की जन्मस्थली ,  
रामकृष्ण परमहंस की पुण्य धरा, मदर टेरेसा की आश्रयस्थली ,
महाराणा प्रताप की हल्दीघाटी, कृष्ण कन्हैय्या का गोकुल प्यारा , 
विश्व वन्दनीय, वीरों की भूमि, प्रिय देश मेरा, भारत न्यारा!!
 
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र 
 
 
 
 
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बधाई हो!
  • बिल्कुल दिल को छू लेने वाली रचना
  • आपकी लेखनी प्रशंसनीय है
  • बहुत ही सराहनीय है। इसे पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई
  • बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।