दिल के पास तुम रहते हो!
आम्रमंजरियां देख, कुहूं कुहूं बोले कोयल,
मधुर सुर-लहरियों से, करें तन-मन घायल!
आसक्त भ्रमर अवनि-अंबर में अमि घोले!
पंखुड़ियां शरमा होले से घूंघट पट खोले!
रति-मदन क्रीड़ा देख लहरें हुई मदमस्त!
गोपियों संग नंद-नंदन रासलीला में मस्त!
सागर में समर्पित सरिता निहारे सूर्यास्त!
प्रियवर! दिल-दर्या के पास रहो आश्वस्त!
डम डम डमरु, बाजे घुंघराली पैंजणियां!
पार्वती बावरी देख कैलाशपति रंगरसिया!
दिल के मंदिर में प्रतिष्ठित महादेव प्रियवर!
तप-त्याग से मिले गौरांगी, मनवांछित वर!
कालिंदी तट राधा कान्हा की निरखे राह!
दिल के पास रहते फिर भी निकले आह!
कान्हा! बांसुरी की धुन मधुर, मनमोहिनी!
सम्मोहित करें ब्रह्माण्ड खिले मधुमालिनी!
मीरा के गिरधारी, दिल से दिल की यारी!
दिल के पास नहीं रग-रग में बसे श्रीहरि!
लोकलाज धूल का फूल, मीरा कृष्णप्यारी!
जोगन बन घूमे राजमहल की राजकुमारी!
दिल-लगी बुझे कैसे? प्रीत-रीत निराली!
दिल के पास रहते-रहते भूले पीहर-गली!
दो-चार दिन सुहावे बाबुल, होली-दिवाली!
मायर भूल पगली बोले.. पिया की बोली!
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा |