आँसूं न आने दीजिए

अंतरराष्ट्रीय बुजुर्ग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 

धुंधलाती अंखियों में आँसू न आने दीजिए,
लुटाये हैं प्यार दुलार मोती, रुसवा न कीजिये।।

पलकों के पालने में झुलाया हैं लाडो, न कभी भूलिए,
ढलती साँझ में थरथराते हाथों को सहारा दीजिए।।

जीवन बगियां के बागबान, दिल आहत न कीजिये,
लम्हा-लम्हा जिंदगी का लुटाया हैं, दिल न यूँ तोड़िये।।

कांटे न चुभने दिए पांव में, उपकार न बिसारिए,
अपने हिस्से का सबकुछ अर्पित किया मात पिता ने, परवाह कीजिये।। 

वृद्धाश्रम और पालनाघर सोच हैं दूषित, वक्त रहते संभलिए,
आज हो रहा, कल वही होगा, जीवनचक्र पीर न झेलिये।।

चंचल जैन

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