नशा नाश का कारण
नशा नाश का कारण

लगती लत जब यह बुरी, करता नशा विनाश।
तन-मन-धन बर्बाद हो, मिटता धर्म प्रकाश।।
मिटता धर्म प्रकाश, खोखला करता यह तन।।
खोता जीवन आस, लुटे घर आँगन श्री धन।।
भूले अपना भान, नशे में धुत हो छलती।
छोडे सब संसार, ठेस बहु गहरी लगती।।

चंचल जैन
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