आओ गणपति देवा

 

आओ गणपति देव, विघ्नहर्ता सुखदाता।
भावे पुजते भक्त, सौख्य, विद्या, बल दाता।। 
हरने पीडा, शोक, पधारो तारणहारा।
पूजा, स्तुति, गुण गान, भाव भक्ति नेह धारा।।

स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र

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