गूंजेगा महाराष्ट्र छत्रपती शिवाजी महाराज की जय जयकार से,
गोब्राह्मणप्रतिपालक राजे शिवाजी महाराज के शौर्य, पराक्रम की झंकार से।।
'जाणता राजा', पूजनीया जिजामाता, शहाजी राजे की आंखों का तारा,
'हिंदवी स्वराज्य' के लिए 'चंद मावळो' संग, दुश्मन को ललकारा।।
'गनिमी कावा' से लडे, गुरुदेव 'दादाजी कोंडदेव जी' के मार्गदर्शन में,
माता जिजाऊ की प्रेरणा और प्रोत्साहन दीप आलोक में।।
तानाजी, जीवा, शिवा काशी, बाजी प्रभु से हीरे, माणिक-मोती,
प्राणप्रिय, महाबली, महापराक्रमी, महावीर
राजा के प्राणप्रिय संघाती।।
देवी मां भवानी के आशीर्वाद, तलवार तेज चमचमाती,
दुर्जनों का काल, दुश्मन का अंत करते 'गढ़' जीतते सेनापती।।
लाडले शिवबा के राज्याभिषेक से हुई माता जिजाऊ की स्वप्नपूर्ती,
जन-मन-धन, नर-नारी, पशुधन रक्षणार्थ, राजा शिवाजी हुए छत्रपति।।
स्वराज्य की सीमाएं, विशाल गढ़, धर्मध्वज, संस्कृति से सुशोभित,
शूर, वीर, धीर, संस्कारी राजा, कर्तव्यकर्म, मानवता धर्म निहित।।
छत्रपती शिवाजी महाराज की जय जयकार, चहुँ दिशि सुरभि पराक्रम की।
शत शत नमन, वन्दन, अभिनंदन, जयकार युगपुरुष शिवाजी महाराज की।।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र