सिहरी छंद

सिहरी छंद

मनोहर प्रकृति,
सुंदर सृष्टि, प्रभु उपकार,
अद्भुत शिल्पकार। 

श्रमसाध्य सफलता,
ज्ञान कौशल गौरव गुणगान,
पाते सम्मान।

ऊंची ऊडान,
जिद, जुनून, हौसला, अरमान,
विस्तृत आकाश।

रिमझिम रिमझिम
बूंद-बूंद छमछम गान,
सृष्टि मुस्कान।

पर्यावरण मित्र,
यहां वहां पेड़ लगाते,
अनुपम चित्र।

हौले हौले
भोर सुहानी आयी इठलाती
प्रभाती गाती।

स्वरचित  मौलिक  रचना
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
इस पर लोग क्या कह रहे हैं