राम नाम आधार जगत में
क्यूँ मनु को मैं दास बनाऊं,
सेवा, जप, तप, त्याग परीक्षा
क्यूँ मैं प्राणी जन को तड़पाऊं;
मन वैरी न आज्ञाकारी
शीतलता इसमें भर पाऊं,
हे ईश्वर! इतनी शक्ति दे दो
कि प्रेम भाव सबसे रख पाऊं;
हरि जीवन संघर्षो के
पदचिन्हों का आधार धरू,
जन सेवा और मर्यादा का
अनवरत नित मैं पाठ करूं;
आत्मज्ञान और यशकीर्ति का
जीवन में उद्देश्य रखूं,
लक्ष्य प्राप्ति तक इस माया से
चंचल मन को दूर रखूं;
हे राम! इस कलियुग में मैं
नित तेरे नाम का जाप करूँ,
सांसो के इन अनुपम क्षण को
प्राणीमात्र पर कुर्बान करूं!