यशोदा छन्द...
नमन माँ शारदे!
यशोदा छन्द  

बड़ा भरोसा, किया सदा ही।
खुशी परोसी, यदा-कदा ही।।
जरा पिया को, पुकार देखो।
खयाल तीखे, निकाल फेंको।।


क़मीज मैली, नसीब फूटा।
इमान सच्चा, गरीब लूटा।।
किया खुदा का, इनाम जाया।
ज़मीर यारों, न बेच खाया।

अवैध बस्ती, मकान कच्चे।
बिखेर देते, मुकाम सच्चे।।
उजाड़ देते, बसी बसाई।
गृहस्थ की भी, दुकान स्थाई।।

जरा हटा लो, नकाब कारे।
अजीब होंगे, जवाब सारे।।
उड़ान ऊँची, भरे परिन्दा। 
निशान छोड़े, प्रयास जिन्दा।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।



इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।
  • बहुत बढियाँ