सुबह की सैर
राग पुष्प सुंदर मय धरती
नव पत कोमल प्रकाशित करती
शीतलहर के आ जाने से 
ओस की बूंदे श्रृंगारित करती...

मोती सा बूंदों का घेरा
भोर हुयी फिर हुआ सबेरा
ओझल होते दृश्य मधुर को
मानस पटल पर है उकेरा...

शीतलता नयनों में भरती 
व्यंग्य-विकार को दूर है करती
उलझन भरे इस जीवन को 
तरोताजा यह रोज है करती...

सूरज की किरणों में चमके
इंद्रधनुष के रंग है बिखरे
ठण्ड भरे इस मौसम में 
लोगों के है चेहरे निखरे...

प्रकृति के है बहुत करिश्में
कभी तो घर से निकलो अपने
सुबह की सैर करो जी भर
स्वस्थ रखो इस मन को अपने...

द्वारा Kapil Tiwari
Shared26 Nov 2025
Start 26 Nov 2025
End 26 Nov 2030
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत ही नयानरम्य दृश्य, मन को उल्हासित करती प्रस्तुति! बधाई कपिल जी। 👌👌🌹🌹🌹👌👌