ग़ज़ल
सूनी सूनी सी दिल की गली रह गई
तू गया जब से दुनिया थमी रह गई
फिर से बारात लौटी किसी द्वार से
एक दुल्हन सजी की सजी रह गई
गीत के अर्थ बिल्कुल हैं बदले हुए
नाम की सिर्फ़ अब मौसिक़ी रह गई
भर गया जब खिलाड़ी का मन खेल से
कोई चौसर बिछी की बिछी रह गई
बज़्म में यार मुझसे मुख़ातिब भी था
बात फिर भी मेरी अनसुनी रह गई
बलजीत सिंह बेनाम
हाँसी (हरियाणा )