चीनी-हिंदी भाई-भाई ..
तोहरे अंगना खटिया लगाई ...
हिम्मत है तो करो लडाई ...
चीनी-हिंदी भाई-भाई ....
छिपकली संग गटकाय गए हम….
इंच-इंच तोहरी धरती मैय्या ....
बाजार पटे हैं हमरे माल से ....
भय्या! तुम करो ता-ता-थैय्या ...
चाचा को समझाई दिए थे,
अबहु न अक्ल आई तुमको?
ड्रेगन है हम ...छुपे भेडीये!..
अजगर से निगल लेंगे तुमको !!
तोहरा दुश्मन, हमरा जँवाई,
कर्ज में डूबी आतंक की खाई!
मिचमिची आँखों की खुली कलाई,
भाई-भाई लड़े तो खुश भोजाई!
"सौ सवालों से ख़ामोशी अच्छी" ...
जननायक ऐसा क्यों बोले भला?
कठपुतलियों का खेला होवे निराला ....
कायरो की बस्ती का यही झमेला,
देश हमरा, सजा बंजारों का मेला ...
गद्दारों का हैं देश में बोलबाला,
खाएंगे यहाँ, गाएंगे दुश्मन-गीत-माला!
धूर्त, चापलूसों से पड़ा हैं हमरा पाला
मिचमिची आँखोंवाला करें गड़बड़ झाला ..
हम वार्ता-वार्ता खेलते रहें ..
वो माँ का आँचल तार-तार करते रहें...
वो इंच-इंच पर हक़ जताते रहें,
हम शहीदों की चिताओं को आग देते रहे.....
कब तक चलेगा यह शर्मनाक खेला?
शहीदों की चिताओं पर लगेगा मेला?
कब तक दोस्तों के नाम पर साँप पालेंगे हम?
कब 'प्यार की पाती' नहीं 'सर्जिकल स्ट्राइक' करेंगे हम?