गहरे भाव   ‌दो घंटे हो चुके थे, गिरीश को घर आकर लेकिन वह एक स्तब्ध मूर्ती स्वरूप अपने सोफे पर बैठा रहा। घर में सब लोग थे किन्तु गिरीश न जाने कहाँ खोया हुआ था। 

बेटी रेश्मा, तुम बाहर कोई डरावना सिनेमा देखकर आये हो क्या? इसे देखो, कैसे भूत बनकर बैठा हुआ है.. गिरीश की माँ ने अपनी बहू को सवाल किया। 

दोनों की शादी हुए कुछ ही हप्ते हुए थे। वह दोनों एकसाथ अपना समय बिता रहे थे ताकि वे एक दूसरे को समझ सके। आज वह दोनों एक माॅल में गये जहाँ उन्होंने एक खूबसूरत प्रेम कहानी का सिनेमा देखा और उनके मन में सिनेमा का हर किरदार कहीं ना कहीं बैठ गया। दोनों ही बड़ी खुशी के साथ सिनेमा देखकर बाहर आये तो गिरीश अनजाने से ही एक लड़की को टकरा गया, और अपना आपा खो बैठा। 

कैसी बातें कहती हो माँ जी, इस खुशी के समय कोई भूत - पिशाच की फिल्में भी भला कोई देखता है। इस समय तो प्यार भरी कहानियों में ज्यादा मजा आता है। 
हा, हा तो फिर ये प्यार की कहानी को देखकर भूत क्यों बना बैठा है। 
वही तो मैं कबसे पूछ रही हूँ, लेकिन इन्होंने ने तो मुंह में दही जमा ली है। कोई बात करने को राजी ही नहीं हो रहे। 

रेश्मा ने एक अजीब तरकीब सोची ताकि अपने पति को वर्तमान में ला सके। अपने बिछाने पर बैठा अपनी दोनों ऑंखें खुली रखकर गिरीश गहरी सोच में डूबा था कि पीछे से गिरीश के कंधे पर चूड़ियों की खनक सुनकर रेश्मा को नजरअंदाज करने लगा। गिरीश का यह रूप देखकर रेश्मा को कुछ अलग लगा क्योंकि ऐसा बर्ताव उसने इससे पहले कभी नहीं किया था । 

क्या हुआ जी, सारा मजा किरकिरा कर दिया। जबसे वह हादसा हुआ है आपका मन कहीं दूर चला गया है। शरीर तो यही है लेकिन मन कहीं और। बताओ तो आखिर बात क्या है? .. रेश्मा ने उसके मन की पीड़ा जानने के लिए सवाल किया। 
तुम नहीं समझ सकोगी मेरे दर्द को, मुझे अपने हाल पर छोड़ दो और जानकर भी क्या तुम मेरे अतित के जज्बातों को भूला सकोगी? 
कहकर तो देखो, लेकिन ऐसे मौन न रहो.. रेश्मा ने प्यार से उसके दिल पर हाथ फेरते हुए कहा। 
गिरीश रेश्मा की बातें सुन निढाल- सा हो गया और अपनी बात कहते हुए कहने लगा, 

संगिता नाम है उस लड़की का जिसे मैंने कभी अपना भविष्य बना लिया था, मन ही मन  पर नियति को कुछ और ही मंजूर था तो मेरे सारे के सारे सपने धरे के धरे रह गए। वह तारीख मुझे आज भी याद है जिस दिन मैं उसे वापस मिलने का वादा देकर अपना भविष्य बनाने निकल पड़ा था। जब मैं उसे मिलने के लिए तय वक्त पर पहुँचा तो पता चला कि वह कभी मेरे लिए बनी ही नहीं है। मैंने तो उससे शिद्दत से चाहा था लेकिन उसको तो एक अमीर घराने के लड़के से प्यार था। उसे ऐसा पति चाहिए था, जो उसकी हर जरूरतों को मिनटों में पूरा कर सके और उस वक्त मेरे  पास वह सबकुछ नहीं था जो उसकी ख्वाहिशें पूरी कर सके। उस वक्त जो गहरे जज्बात उसके लिए थे शायद कभी किसी और के लिए नहीं हुए, तुम्हारे लिए भी नहीं। आज जब उसे देखा तो उसके प्रति वही पुराना प्यार फिर से उमड़ पड़ा। 

हा, तो यह थी तुम्हारी प्रेम कहानी। ये दुनिया गोल है मेरे गिरीश बाबू, जिसे हम भूलना चाहो वही घूमकर हमारे सामने आता है। इसलिए भूत को भूलना ही हमारे लिए बेहतर है। 
कितनी आसानी से कह गई ये बातें, जिसपर बिती है न वही जानता है। मैंने तो पहले ही कहा था तुम मेरे दर्द को नहीं समझ सकती। 
अब मैं तुम्हें एक कहानी सुनाती हूँ, 

एक दस साल की नादान बच्ची अचानक गायब हो जाती है और उसे ढूँढने के लिए सारा प्रशासन जुट जाता है लेकिन वह कहीं नहीं मिलती। एक दिन बड़ी हिम्मत और चालाकी के साथ वह गुंडों के चंगुल से भाग निकलती है। वह बीच सड़क पर अपने पिता से जा टकराती है और दोनों दूर तक भागते गुंडों के आतंक से, उस हादसे में तो वह बच्ची बच जाती है पर उसके पिता की मौत हो जाती है। बच्ची की माँ को सारी बिरादरी दूसरी शादी करने के लिए कहती है, लेकिन वह नहीं मानती। वह हररोज पति को याद करते हुए अपनी बेटी से छुप - छुपकर ऑंसू बहाती रहती है, लेकिन अपनी बेटी को इसकी भनक भी नहीं लगने देती। बेचारी लड़की अपने पिता की मौत का दोष अपने आप को मान लेती है और अंदर ही अंदर घुटती रहती है। माँ के दर्द को और आसपास के लोगों की अन्य पीड़ाओं को देखकर वह निश्चय कर लेती है कि वह कभी किसी से नहीं डरेगी और अपनी लड़ाई खुद लड़ेगी  .. कहते- कहते रेश्मा के नेत्र गीले हो आये। 

वाह, क्या कहानी सुनाई है तुमने। कल्पनाओं की सैर कर तुम खुद ही रोने लगी.. गिरीश उसकी इस कहानी पर ठहाका मारने लगा। 
ये कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि एक लड़की की आपबीती है। जिस कहानी को सुनकर तु‌म्हें जोर- जोर से हंसी आ रही है न उस कहानी की वो दस साल की नादान लड़की कोई और नहीं बल्कि तुम्हारी पत्नी रेश्मा यानी मैं हूँ, हा वह मैं ही हूँ.. इतना कहकर रेश्मा की रूलाई फूट पड़ी और वह जोर से रोने लगी। 

गिरीश को एहसास हुआ कि वह कितना कमजोर है, बाहर से बलिष्ठ दिखने वाला गिरीश अपनी बिवी से कमजोर निकला। दुनिया में हर एक व्यक्ति ने कहीं न कहीं चोट सही होती है, अगर वही पुराने जख्मों को याद करें तो जिंदगी जीना मुश्किल हो जाता है। अपने गहरे भावों को पाने की कोशिश तो वक्त रहते कर लेनी चाहिए पर वह हमारे हाथों से दूर हो ही जाए तो उसे अपने तक ही सीमित रखें। आज गिरीश अपनी बिवी की बातें सुन उसपर कायल हो गया और वह दोनों एक- दूसरे की बांहों में समेटे प्यार की सीढ़ियों पर आगे बढ़ने लगे।

 मंथन देवरे

द्वारा MANTHAN DEORE
Shared09 Feb 2025
Start 09 Feb 2025
End 09 Feb 2030
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