जने देवकी शिशु कारा में।चले वसुदेव जल धारा में।
टूट गई जंजीरें सारी।
देव रूप पापी पर भारी।।
छू कर कान्हा उतरा पानी।
यमुना पगली बड़ी सयानी।
नन्द यशोदा गेह कन्हैया।
गोप-गोपियाँ लेत बलैया।।
हर्षित बहुत यशोदा माई।
देख नन्द-शिशु खुशियाँ छाई।
गोकुल में बाजे शहनाई।
घर-घर मंगल गीत बधाई।।
मुख में मिट्टी कान्हा डाले।
मात यशोदा नटखट टाले।
बाँध किसन बोली मुख खोलो।
देख जगत को मन भ्रम धो लो।।
देख पूतना हरि मुस्काएं।
चूस-चूस स्तन अमिरस पाएं।
नाचे कृष्ण कालिया फन पर ।
खुशियाँ पहुँची हैं अब घर-घर।
गोकुल लल्ला किसन कन्हैया।
बाल कृष्ण की दो-दो मैया।
जन्मदायिनी-पालनहारी।
जगत तारिणी, जग बलिहारी।।
पला-बढ़ा गोकुल में ग्वाला।
राधा प्रियतम मुरलीवाला।
रास कभी कृष्णा की लीला।
चले पहन पीताम्बर पीला।।
धर्म स्थापना हित तन धारे।
अरि दल चक्र सुदर्शन मारे।
भगवद गीता सुन ले प्यारे।
रिपु संहारी श्रीहरि न्यारे।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।