चीनी-हिंदी भाई-भाई ..
तोहरे अंगना खटिया लगाई ...
हिम्मत है तो करो लडाई ...
चीनी-हिंदी भाई भाई ....
छिपकली संग गटकाय गए हम….
इंच-इंच तोहरी धरती मैय्या ....
बाजार पटे हैं हमरे माल से ....
भय्या! तुम करो ता-ता थैय्या ...
चाचा को समझायी दिए थे,
अबहु न अक्ल आई तुमको?
ड्रगन है हम ...छुपे भेडीये!..
अजगर से निगल लेंगे तुमको !!
सौ सवालों से ख़ामोशी अच्छी ...कट्पुतलियों का खेल निराला ....
कायरो की बस्ती में ..बंजारों का लगा है मेला ...
चीनी सोया टेंट में ..शहीद लहूलुहान पड़ा माँ भारती की गोद में !
वो वार्ता-वार्ता खेलते रहे ..शहीदों की चिताएँ जलती रही .....
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र!