शीर्षक: ये जनता हैं..
राजनीति भी क्या 'टुच्ची' चीज है जी... क्या-क्या नहीं करवा देती! कल तक साम्प्रदायिकता का ढ़ोल पिट-पिट कर एक-दूसरे के आगे ताल ठोंक कर खड़े रहनेवालों को भी एक-दूसरे से गले मिलने को मजबूर कर देती है! क्या कहाँ? ये 'प्रो-कबड्डी' लीग है या आई-पी-एल? ससुरा....
ये कोईं दोनों टीमों का बराबरी पर जीत का जश्न थोड़े ही न है? यह तो दो हारे हुए जुआरियों का समधि-मिलन है... चले थे कुश्ती लढने और अचानक एक-दूजे से गलबहियां डाल मुस्कुरा रहे हैं... अरे भाई.. इतनी जल्दी दल-बदल? इतनी फुर्ती तो गिरगिट भी नहीं दिखाता! जनता को काटजु जी सा मूर्ख समझ रक्खा हैं जी?
जनता ऐसी पटखनी देगी कि पूरे मटियामेट हो जाएंगे यें दल-बदलु!क्या कहा...डूबते जहाज में कौन ठहरेगा जी?
कुछ भी कहो! कल तक आदर्शों की बात करने वाले, सिद्धांत की दुहाई देनेवाले, देश पर मर-मिटने वाले न जाने आज कौनसे सिद्धांत की बिना पर एक-दूसरे के गोद में जा बैठे हैं पता ही नहीं चल पा रहा! ये इनका समधि-मिलन देश को बचाने के लिए है या अपना अस्तित्व बचाने के लिए है यह तो सुधि जनता जानती हैं! आखिर बिल्ली आँख मूँद कर दूध पिये तो भी दुनिया को पता तो चल ही जाता है न! क्यों यें दल-बदलु अपने जमीर के साथ-साथ जनता को भी धोका दे रहे हैं? क्यों कल तक के जंगल राज के शेर को, साम्प्रदायिकता के कथित तारणहारों को आज 'जंगल में मोर' नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं? कहीं ये 'भैस के चारे' का कमाल तो नहीं ? एक है जो जेल के सलाखों के पीछे रह कर भी अपने गाल टमाटर से लाल रख्खे हुए लौट आया है और दूसरा है जो सत्तासुंदरी का वरण करने के लिए खुद को 'सिद्धांतो पर शहीद' होते हुए दिखाने की भरसक कोशिश में जेल की सलाखों पर सिर पटक रहा है!
दाद देनी होगी इन राजनेताओं की हिम्मत की.. इनकी गैंडे जैसी संवेदना-विहीन मोटी चमड़ी की!! देश को लूट कर भी ऐसे मुस्कुराते हैं मानो देश पर शहीद हो गए हैं! क्या समझ रक्खा है आपने इस देश की जनता को? गरीब जनता को कब तक बेवकूफ बनाते रहोगे? क्या शर्म भी बेच आये हो देश के साथ? जनता को शतरंज का प्यादा समझनेवालों! सावधान! ये जनता हैं..न वॉशिंग मशीन में पाप धुलते हैं न नकाब ओढ़ने-ओढ़ाने से पाप छुपते हैं! ये जनता हैं..सब का कच्चा-चिटठा जानती हैं... सबको करीब से पहचानती हैं.. इसकी लाठी की आवाज़ नहीं होती..
सिर्फ गुनहगार को अर्श से फर्श पर ला पटकती हैं!
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र|