कैसे करना महिमा मंडन?

गुरु पूर्णिमा पर मेरी भाव अभिव्यक्ति..



    गुरु पूर्णिमा पर्व सुहाना,

     गुरु जनों को बधाना है।

  भक्ति रंग उमंग भर निशदिन,

      उत्सव हमें मनाना है ।।


   गायेंगे हम गुरु की महिमा,

    फर्ज मुझको निभाना है।

   जो गुरु दिये ज्ञान बोध हमें, 

     उनको धोक लगाना है ।।


   पहली गुरु थी माता मेरी ,

    बोली वो सिखलायी थी।

   करवाया उच्चारण मुझसे,

    जीभ  जरा तुतलायी थी।।


   मेरे सभी शिक्षक प्रशिक्षक ,

      थे  गुरु मेरे वे ज्ञानी ।।

 मैं अकिंचन अदना छात्र था,

     करते थे हम नादानी।।


   कैसे करना महिमा मंडन,

     गुरु वर कद वो ऊंचा है।

कैसे लिखता गुरु पर कविता ,

  शब्द  भाव वो नीचा है ।।


प्रयास किया फिर भी तनिक सा,

   शब्द  वचन पद जोडे है ।

   लिखा मेरी वामन बुद्धि से,

        तोड़ मरोड़ मरोड़े है।।


स्वरचित: अशोक दोशी 

      

   



 

  

     

   

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बधाई!