अद्भुत किमया


अद्भुत किमया

लाल, पीला, हरा, नीला,
रंगबिरंगी सुंदर यह दुनिया,
मनहर रूप, विविध छटायें,
परम प्रभु की अद्भुत किमया।।

प्राची में छलकती लालिमा,
सूरज किरणों की आभा।
हरियाली धरा, नीलाभ गगन,
रंगबिरंगी फूलों की शोभा।।

प्रकृति ने सजायी हैं रंगोली,
ओस मोतियों की गुंथी माला,
झिलमिल करते तारें रूपहले,
जीवन हैं रंगों का मेला।।

मन को ललचाते सुंदर रंग,
जीवन में भरते आनंद तरंग,
सबसे सुंदर, सुहाना प्रेम रंग,
खिली-खिली रहे उल्लास उमंग।।

स्वरचित  मौलिक  रचना
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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