शीर्षक : सावन की रिमझिम बौछारें
सावन की रिमझिम बौछारें,
तन को राहत देती है।
बहलाती है वो मन को मेरे
छुपा सुकेत सुकेती है।।
खुशियां छायी सबके मन में ,
मन किसान हर्षाया है।
खेत कुए तरबतर हो गये,
मौसम माफ़िक़ आया है ।।
मूंग बाजरा मक्का अरहर,
धान बुवाई चालू है।
जोत रखें थे पहले से ही,
खेत खाद भर बालू है।।
आये तीज त्योहार प्यारे,
आंगन बंधन झूले है ।
आयेगी बेटियां झूलेंगी,
बहन को नहीं भूलें है।।
स्वरचित: अशोक दोशी