साकी! तेरी महफ़िल में …

साकी! तेरे मयखाने में … 

जिंदगी से सुलह कर ली!

रिश्ते-नातों को दफ़न कर .... 

तेरी बाँहों में पनाह ले ली!

दुनियाँ के अंधेरों में … 

जब साये भी दगा दे गए .... 

साकी! तेरे मयखाने में … 

तलाशने वफ़ा आये!!!

मुद्दतों बाद फिर लौटे ,

साकी! तेरे मयखाने में!

ज़िन्दगी बेवफ़ा सही,

मौज़ूद तू वफादारों में!

मद्दिम रोशनी में .... 

झिलमिलाते रंगीन चेहरें .... 

छलकते पैमाने में तैरती .... 

रंज-ओ-गम की स्याह रातें !

भूलना चाहते है जिन्हें .... 

अक्सर वहीँ नज़र आएंगे  

साकी! मय के प्याले में भी .... 

यादों को न डूबा पाएंगे!

साकी! तेरी महफ़िल में…

शमा जलती रहेेगी बेशर्म!!

पतंगे की मौत का … 

कौन जानेगा छुपा मर्म?

 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं