देख तस्वीर रात भर में..
शीर्षक : देख तस्वीर रात भर....

"देख तस्वीर रात भर" मुझे,
  निंद कहाॅं वो आयी थी।
  आसमान से बरसे गोले,
 मौत  दस्तक लगायी थी।

दोनों देशों का अड़ियल पन,
   चली भारी लड़ाई थी।
 आम  मासूम निर्दोषों की ,
 जान हलक अटकायी थी।।

अहंकार पोषे  तुम अपना
   मासूम क्या बिगाड़े है
 उनकी ऐसी क्या  गलतियां 
    बच्चे बाल  प्रताड़े है ।। 

 बहुत हुई बर्बादी अब तो
  रोको घातक गोलो को
कौन सुनेगा  उनकी चीखें 
   बेबस उनके बोलों को।

प्रभाव  हानिकारक जंग का
    संरजाम  संहारी है 
अंजाम बिल्कुल नहीं अच्छे 
    बंद करें जो जारी है।।

स्वरचित:अशोक दोशी
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