तन्हाईयों में तेरी याद सताती हैं..

तन्हाईयों में तेरी याद सताती हैं,

दिलों पर दे दस्तक, अक्सर रुलाती है!

 

वो गुज़रे लम्हें, वो यादों की लड़ियाँ,

वो उलझें से धागे, वो रिश्तों की कड़ियाँ,

दुपट्टे के शामियाने, वो मीठी सी लोरियाँ,

झूठी फरियादें, वो दुआओं की डोलियाँ..

 

तन्हाईयों तेरी छवि उभर आती है..

दिलों पर दे दस्तक, अक्सर रुलाती है!

 

वो मासूम शिकवे, वो भोला सा बचपन, वो खेल-खिलौने, वो खोया लड़कपन!

माँ! तेरी बन्दगी में, ख़ुदा की नेमतें थी, मुश्किल ज़िन्दगी में, तेरी रहमतें थी!

 

आँखों के दर्पण में अक्स झिलमिलाता है!

दिलों पर दे दस्तक, अक्सर रुलाता है!

 

यौवन की दहलीज, नादानियाँ दिल की...

छुपाने की साजिश, गुस्ताखियाँ कल की...

लबों पर थे आशीष, जुबाँ पर दुआएँ थी! 

ख़ुदा की थी बक्शिश, शक्ल पढ़ लेती थी!

 

साँसों की सरगम में माँ दर्द छुपाती है...

दिलों पर दे दस्तक, अक्सर रुलाती है!

 

ज़िन्दगी की धूप-छाँव, वो करवट बदलता दाँव,

वो मंझधार में नाव, वो किनारों से दूर गाँव!

वो रूहानी भाव, वो मंजिलों का पड़ाव,

वो बरगद की छाँव, वो महफूज़ नन्हें पाँव!

 

अंधियारी राहों पर माँ दीप जलाती हैं,

दिलों पर दे दस्तक, अक्सर रुलाती है!

स्वरचित तथा मौलिक,

कुसुम अशोक सुराणा |

 

 

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