कान्हा...
कान्हा..
 
तुम प्रीत, तुम गीत, 
सखा श्याम, मन मीत, 
कान्हा संग कैसी जीत, 
बन्धन हटाइए!
 
कालिंदी किनारे रास, 
भीगी-भीगी मन आस,
मुरली में राधा वास,
प्यास ये बुझाइए!
 
काहे खेले लुका-छुपी,
छीने वस्त्र कर्म रूपी,
खोले भाग्य मोक्ष कुप्पी , 
राधा-राधा गाइए
 
विष्णु अवतार श्याम,
पीड़ हरे हरि नाम, 
धर्म रक्षा मुख्य काम,
प्रीत ये निभाइए!
 
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई 🙏🙏🙏
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