आया सावन झूम झूम कर....
आया सावन झूम झूम कर,
नभ घटा करती वो शोर
बरसाती है जल वो झिमझिम
नाच उठे मन का वो मोर।।
देखो माह मन भावन आया ,
देखो माह शुभ पावन आया
छा गयी खुशियां चारों ओर
छायी हरि हरियाली सुंदर
मौसम के वो अपने तौर ।।
देखो माह मन भावन आया ,
झूले पड़े आंगन में मेरे,
पवन झकोरों का है जोर-२
ठंडी ठंडी जलज बौछारें
प्यारा लगे मुझको ये दौर।।
देखो माह मन भावन आया ...
आये दालिम आडू आलुबुखारे,
फल पपीते का अंबार -२
खिला खिला बाजार फलों का
मौसम बड़ा है खुशगवार।।
देखो माह मन भावन आया ...
धर्म ध्यान सत्संग का मौसम
कहते चौमासा इसको
कर लें आत्म चिंतन जरा सा
श्रवण कर गुरु वाणी रसको
देखो माह मन भावन आया ...
बीज जो बोये थे ज़मीन में
बन के पौध अब उग आए
जीवन का ये आधार बनेंगे
जय किसान हम सुख पाए
देखो माह मन भावन आया ...
स्वरचित:अशोक दोशी