शायरी
हसरतें मन की अरमान बन गयी,
खोयी जो जमीं आसमान बन गयी।
मुकद्दर किसी का हमजाया नही,
और तकदीर किसी का साया नही।
मिल जाता है मुकाम किसी को वक्त से पहले,
तो किस्मत सभी पर मेहरबान तो नहीं।

द्वारा Kapil Tiwari
Shared03 Dec 2025
Start 31 Dec 1899
End 31 Dec 1904
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