2699 2699 शायरी हसरतें मन की अरमान बन गयी,खोयी जो जमीं आसमान बन गयी।मुकद्दर किसी का हमजाया नही,और तकदीर किसी का साया नही।मिल जाता है मुकाम किसी को वक्त से पहले,तो किस्मत सभी पर मेहरबान तो नहीं। Label Directed by द्वारा Kapil Tiwari Shared03 Dec 2025 Start 31 Dec 1899 End 31 Dec 1904 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें शायरी © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें