5 2 2561 5 2561 घनाक्षरी छंद घनाक्षरी छंदनेता गुनगुना रहें,गली-गली घूम रहे,नोटों की उछाल हैं,गौर फरमाइए।।एक दूजे की धुलाई, हो रही टांग खिंचाई, तू-तू मैं-मैं की तूती,वादें आप पाइए।।धरा पर आये तारें,उजले दोगुले सारें,श्वान साथ-साथ चले,दामन बचाइए।।मीठी मिश्री से बोलते,हाथ जोडे वे रहते,सुध बुध चेत कर,निशान लगाइए।।चंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared19 Dec 2025 Start 19 Dec 2025 End 19 Dec 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Admin Manager 23-Mar-2026 Comment Like बहुत बढ़िया लिखा है। Ashish Jain 20-May-2026 Comment Like सुन्दर घनाक्षरी छंद © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें