सिद्धि विनायक!
शीर्षक : सिद्धि विनायक!
 

विघ्न विनाशक, मंगलदायक,

सन्मति दाता, सिद्धि विनायक!
सुख-संपत्ति, बुद्धि-सिध्दि दायक,
शुभारंभ हो, हे गणनायक!
 
त्राहि-त्राहि हैं सकल चराचर,
जीव-जन्तु, जलचर, विषधर!
पर्वत-नदिया, धरती-अंबर! 
वृक्ष-वल्ली, नदी-नाले, समंदर!
 
गणपति बाप्पा! इटपट आ जा!
पृथ्वी लोक को जीवन दे जा!
कोरोना को देश-निकाला दे जा!
मूर्ख मनुज को सन्मति दे जा!
 
वक्रतुंड! हे शिव-गौरी तनया!
चारभुजा धारी, बाप्पा मोरया!
बुद्धि प्रदाता, कार्तिकेय भ्राता,
विघ्नहर्ता, सुखकर्ता, दु:खहर्ता!
 
एकदंत, गणपति, गजमुख धारी,
मस्तक विराजे शशि, मूषक सवारी!
पदपंकज में नुपूर, पितांबर धारी,
रिद्धि-सिद्धि स्वामी, जग उजियारी!
 
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा,पवई, मुंबई, महाराष्ट्र!
 
 
 
 
 
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