सबसे पहले मैंने नाव को बंदरगाह से निकलते देखा।

पहले मैंने नाव को पोर्ट से निकलते देखा
फिर मैं उस नदी के किनारे पहुँचा
शायद वो वहाँ आकर लैंड करे।

इस साल शहर के राजा ने थोड़ी रहम दिखाई है।
इस साल सिर्फ़ दिल टूटेगा
सबके जिस्म को मिलेगा

ऐ मेरे प्यारे, तेरा दरवाज़ा, तेरा ठिकाना
सब कुछ यहाँ से बहुत, बहुत दूर है
कोई बात वहाँ नहीं पहुँचती, कोई इशारा नहीं

दो लोगों के जिस्मों में देखने का बस एक ही तरीका है
जब ज़िंदगी की घनी रात में
सिर्फ़ हमारी दो आँखें चलती हैं

मेरी ज़िंदगी में जमे हुए पेड़ हैं
बर्फ में जमी नदियाँ,
फिर भी इन सबके गहरे राज़ में
एक धूप से भीगा समंदर का किनारा घुस सकता है।

एज़ोइक
जानते हो जमशेद, चाँद से मेरी छत तक
एक रात के लिए भी ताका शहर की चाँदनी नहीं बख्शी जाती
वो भी एक क्रिमिनल बन जाता है।


द्वारा Suvayan Dey
Shared23 Apr 2026
Start 23 Apr 2026
End 23 Apr 2027
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