सफर जिंदगी का
फोटो प्रतियोगिता

थक गये हैं पांव साथ चलते-चलते,
सूरज हुआ मद्धम शाम ढलते-ढलते,
पलभर ले लो विश्राम दूर है मंजिल,
कट जायेगा सफर बातें करते-करते।।

स्वरचित मौलिक रचनाकार
चंचल जैन
इस पर लोग क्या कह रहे हैं