शीर्षक : प्यार भी क्या बला है....
प्यार भी क्या बला है,
कभी ऑनलाइन, कभी ऑफलाइन वाला चुटकुला है!
शोडशी समझ लुटाया दिल,
वह षष्ठी पार 'बाला' है...
जिसके 'वर्चुअल बांहों' में बिताई चांदनी रात,
वो खाँसता बुढ़ाऊ भोला-भाला है!
जिसके प्यार में दीवानी है 'अनारकली',
वो चार ख़वातीनों का शोहर अकेला है!
जिस फेस को देख मरा जा रहा था,
वो साउथ की हीरोइन 'ज्वाला' है..
'एक अनार, सौ बीमार' वाला मामला है!
ये फेसबुक, एक्स, मुखौटों का झमेला हैं,
खोदा पहाड़, निकला हमेशा 'गड़बड़ झाला' है!
हर तरफ धोका ही धोका हैं,
चापलूसों को सुनहरा मौका हैं,
बूढ़े इश्क़बाज लगाते यहाँ चौका हैं,
छैल-छबिलों को कहाँ मिलता यहाँ मौका हैं?
आभासी दुनिया भूल-भुल्लय्या हैं,
खूंखार सांड भी यहाँ भोली-भाली गइया है!
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा , मुम्बई, महाराष्ट्र!