सावन के झूले...


झुला झुलायी ननदी को भाभी
   करती है वोअंतर से प्यार 
   हर्षाती और खिलखिलाती 
      परस्पर करती वे दुलार।।

झुला झुलायी ननदी ......

     देखो यह सावन आया है
      नभ छायी घटा घनघोर 
    चारों तरफ फैली है खुशियां 
     करें कोयलिया  मीठा शोर

   झुला झुलायी ननदी ......

खड़ा है  आंगन  पेड़  वो सुंदर
  पवन झोंकों का है वो जोर
   हल्की हल्की सहज बौछारें 
     अरे आज ठंडी है, वो भोर ।।
झुला झुलायी ननदी ......

     सुंदर दृश्य देखा मनोहर 
    ललचाए मन का वो मोर
    काश गांव में हम भी होते
      हो जाता मन भाव विभोर।।

स्वरचित,:अशोक दोशी
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