लोभ मोह में उलझा मानव

दिनांक २७-५-२०२६
विषय: लोभ मोह में उलझा मानव
१६ १४ में प्रयास किया है 
विधा :ताटंक छंद 


लोभ मोह में उलझा मानव।
  धर्म आचरण को भूला।।
व्यर्थ  गुमाया जीवन अपना ।
 वह अनमोल  महा मूला।।

किया न याद  मंत्र  सार युक्त ।
   दिया न दान गरीबों को।।
मन में करुणा भाव न उपजा
     चाहे नहीं करीबों को ।।

   रखा नहीं मन राम नाम को।
     केवल बस आपा धापी।।
    नहीं किया है लेखन चिंतन‌
    यह  मन बना रहा  पापी।।

    कैसे होगी गति आत्मा की।
      सुख  शाश्वत  क्या पाओगे।।
     किये नहीं  पुण्यों का अर्जन ।
       क्या पता  कहाॅं जाओगे‌।।

स्वरचित: अशोक दोशी
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