नारी, नारायणी...
नारी हूँ सुमंगला, नर की मैं नारायणी।
बेटी, भगिनी, प्रिया, माता मैं कल्याणी।।
तारिणी, तेजस्विनी सृष्टि-सी मैं हूँ रमणी।
सुहासिनी, गंग-सी मैं निर्मल निर्झरणी।।
ममतामयी क्षमाशील धरा धीरज धारी ।। बेशकीमती रत्नमणी, मैं मोहिनी सन्नारी।।
दया, सेवा, करुणा में मेरा अस्तित्व।
वीरांगना मैं, पर कोमल है मेरा कर्तुत्व।।
प्रभु परमात्मा की मैं हूँ परम साधिका।।
संसार संरचना में मेरी हैं अहम भूमिका।।
देवी स्वरूपा, जीवन दायिनी सुजाता माँ।
मंगला, निर्मला, पावनी स्वर रागिनी माँ।।
सम्माननीय, आदरणीय जिम्मेदार हूँ मैं।
गुरु बन, बाल मन में संस्कार बोती हूँ मै।।
संयमी, सहयोगी, आसमां-सी विस्तृत हूँ मैं।
भरती हूँ उँची उड़ान, बाज-सी कुशल मैं।।
कोमलांगी तितलियों-सी, ताजगी हूँ पुष्प की।
राधिका मुरलीधर की, दीवानी मीरा श्याम की।।
चंचल जैन