जीवन का एक पड़ाव

तम सा छाया सफर

उम्र का वो घोल

कैसे समझू इसको

जीवन है अनमोल।


आस भरी है इसमें

उम्मीदों की डोर

मन को यह भ्रमित करें

जाऊं मैं किस ओर 


जिंदगी क्षण भर की

क्यूं भटकूं दर बदर

लक्ष्य एक साध कर

जी लू इसको जी भर


ढले सांझ जब भी

रह न जाए मोल

जीवन के इस घटक को

कर दू मैं अनमोल....


द्वारा Kapil Tiwari
Shared05 Sep 2025
Start 05 Sep 2025
End 05 Sep 2030
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • अत्युत्तम सृजन
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।