लबों पर नाम है, पर कह नहीं पाता,
दिल के इस शोर को, किसी से नहीं जता पाता।
वो साथ चलती है तो, दुनिया ठहर सी जाती है,
उसकी हर मुस्कुराहट, मुझे ताउम्र का साथी बनाती है।
मैं ख्वाबों में उसके, घर बसाता हूँ,
बिना बताए उसे, अपना सब कुछ मानता हूँ।
ये राज़ ऐसा है, जिसे लबों पर लाने से डरता हूँ,
मैं अपने ही दिल में, चुपचाप एक इबादत करता हूँ।