छुम-छुम छुम-छुम करती मैया, आओ बनकर ढ़ाल,नवरात्री में मैया सुधारों, मम मातृभूमि का हाल।।
सहस्त्र किरणों से सजा अम्बर का स्वर्णिम थाल,
कुंकुम लालिमा से सुशोभित मैया का तेजस भाल।।
रूण झुण रूण झुण करती मैया पधारो मेरे द्वार,
नवरात्रि में दरबार सजा लो, करों भारत भू का उद्धार।।u
धवल वस्त्र-धारिणी माँ शैलपुत्री, कमल, त्रिशूल कर धारिणी,
महा योगिनी, माँ सती, निर्मला, भागीरथी, भवतारिणी।।
दशभुजाधारिणी, अलौकिक दर्शन दायिनी, तपस्वी मानिनी,
माँ चन्द्रघण्टा, सिंह आरोहिणी, सुवर्ण आभा की स्वामिनी।।
रत्न-जड़ित कर्णफुल,लाल चुन्दड, कर नर-मुंड श्रृंगार,
प्रकटो अष्टभुजाधारिणी, ले त्रिशूल, खड़ग, तलवार।।
अमृत कलश उंड़ेलो धरा पर, बरसाओ अमिरस धार,
कालरात्रि में माँ दुर्गा, करों भारत भूमि पर उपकार।।
ब्रह्मस्वरूपा, योगिणी, मानिनी, कल्याणी धीर-गंभीर,
हिन्द महासागर करे पद-प्रक्षालन, होय अधीर।।
माँ कुश्माण्डा, आदित्य सम तेजोमय, कुन्दन काया पावनी।
आदिशक्ति तू, तू शक्तिरूपा, कंठ ग्रह-नक्षत्र माल धारिणी।।
स्कन्दमाता तू कार्तिकेय की जननी, चारभुजा धारिणी,
सूर्य मण्डल की अधिष्ठात्रि देवी, माँ कमल विराजिनी।।
विद्या, विवेक,विनय, वाणी, व्यवहार, विचार,
माँ भगवती! जगत जननी, हरो दुःख, दारिद्र, दुराचार।।
ऋषि कात्यायनी पुत्री, बहुभुजाधारिणी,सिंह आरोहिणी,
भद्रकाली, त्रिनेत्र धारी, महिषासुर मर्दिनी, रक्तबीज संहारिणी।।
जगमग-जगमग चमके, तीन लोक में मैया का दरबार,
कालरात्रि में मैया रोको, स्त्री-भ्रूण हत्या-संहार।।
दशो-दिशाओं में गूंजे माँ तेरा नाद-झंकार,
तेरी कृपादृष्टी से फले-फुले जगत, सारा संसार।।
रिद्धि-सिद्धि वरदे! भर दो धन-धान्य-भंडार,
भवसागर से पार लगा दो मैया, नैया है मंझधार।।
खल-असुर-संहार, करो मानव धर्म-रक्षा,
उठा शस्त्र कर-कमलों में, करो सृष्टी-रक्षा।।
महिषासुरमर्दिनी दे दो शस्त्र-शास्त्र दीक्षा,
सिंह आरोहिणी माँ भवानी, सम्पन्न करो प्रतीक्षा।।
रुम झुम रुम झुम बाजे पायलियाँ, खोले कारागार द्वार,
तोड़ मुखौटे भ्रष्टाचारियों दुराचारियों के करे खल-संहार।।
छुम-छुम छुम-छुम करती मैया, आओ बनकर ढ़ाल,
नवरात्री में मैया सुधारों, मातृभूमि का हाल।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।