भाव-कुसुम! माँ भारती!अर्पण करु भाव-कुसुम मानिनी !
प्राणवायु सम तू मातृभूमि, जन्मदायिनी !
चन्द्र-सूर्य तेरे तेजोमय ललाट पर सजे!
माँ सरस्वती, कृपा-सिंधु तेरे अधरों पर वसे !

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! शँखनाद नित करू,
तेरे चरणो की सेवा में सुध-बुध मम बिसरू !
हिन्दवी स्वराज्य के गीत नए गुनगुनाऊँ,
शहीदों की मजारों पर कृतज्ञता की चादर चढ़ाऊँ!!

विश्व पटल पर माँ तेरा, नाम ऊँचा करुं,
तिरंगे की शान में खुद को नौछावर करुं!
देशप्रेम की मशाल, जन-जन में जलाऊँ,
अज्ञान तम को दूर कर, ज्ञान प्रकाश फैलाऊँ!

माँ! तेरे आँचल को हीरे-जवाहरात से भर दूँ!
आत्म मंथन कर खुद को देश के नाम कर दूँ!
माँ भारती! दूध का कर्ज हाथों-हाथ उतार दूँ!
वतन पे कुर्बान हो माँग लालिमा से भर दूँ!

स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई, महाराष्ट्र |

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