लौ आलोकित


पहरा देते सीमा पर, शूर वीर
सैनिक चौकस।
भारत माँ के वे रक्षक, सर्दी हो या हो पावस।।
धूप ठंड हो कंप प्रलय, राष्ट्र प्रेम लौ आलोकित।
भारत माता की जय-जय, विजय गान चहुँ दिशि गूंजित।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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