1 2 4441 1 4441 मतगयन्द सवैया! मत्तगयन्द सवैया: तारक है अरिहंत जिनेश्वर ,भैरव देव करें रखवारी।साधक आतम काज सुधारक,भूतल पावन तारणहारी।।संगम तीरथ तीरण तारण,संबल-कंबल जो मनु धारी।शीतल स्नेहिल रूप हरे दुख,पांच नमो पद उन्नत भारी।देव जिनेश्वर नाम शुभाशिश,मानुष जीवन पातक हारी।साधक बाधक घातक मारक,जीवन दायक सक्षम नारी।।शैशव अंतस निर्मल सुन्दर, आगत स्वागत केसर क्यारी।शंकर मंतर से पढ़ आगम,निश्चय साहस दानव मारी।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई। Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared14 Jul 2025 Start 14 Jul 2025 End 14 Jul 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Intranet Demo 29-Oct-2025 Comment Like बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ। Yuvit Sonu Jain 05-May-2026 Comment Like बहुत बढ़िया लिखा है। मतगयन्द सवैया! © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें