शब्द को शब्द से हराकर तो देखो
अश्क को हाथ से हटाकर तो देखो
लोगो के गम का ठिकाना नहीं यहां पर
कभी गम को खुशी से मिटाकर तो देखो
आनंद की खोज में भटकते यहां वहां
कभी मन को एकांत में लगाकर तो देखो
जीवन बनेगा हरपल प्रेम का खजाना
कभी नफरत को मन से मिटाकर तो देखो
कहते है बचपन वापस नहीं आता
कभी झरने में नाव को बहाकर तो देखो
प्रकृति के घर में क्यों रहते हो मायूस यहां
पल भर खुलकर मुस्कुरा कर तो देखो
जीवन बदलते देर नहीं लगती
पिछला हर गम भुलाकर को देखो
जैसा चाहोगे वैसा बनोगे
एक बार मन को काम पर लगाकर तो देखो।