मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से

मैं पूछूं प्रभुवर....


  मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से ,

   कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन

     मैं पूछूं प्रभु वर महावीर से

    कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन

  कब मुक्ति होगी निज आतम की

      कब पद पाऊंगा मैं परमातम  



    ज्यों पूछे थे गुरु गौतम स्वामी 

      मैं भी तो तुम्हारा श्रावक हूॅं

    कब मिटे अंधियारा आतम का

     मैं भी तो तुम्हारा चाहक हूॅं




   प्रभु   तुम  तो केवल ज्ञानी हो 

    कब मुझको ज्ञान केवल होगा

      कब जितूंगा निज मन बुद्धि से 

         कब सक्षमता वो बल होगा 

        

    मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से 


   चंडकौशिक नाग उगारा तुने -२

     स्वामी कब मेरा उद्धार होगा

     मैं भी भटका पथ  जन्मों से‌

     कब मिले मोक्ष मिट जाए रोगा ।।


मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से ,

   कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन


      


    तुने चंदन बाला को तार लिया-२

       हुई सद्गति क्रूर गौशालक‌ की‌

    प्रभु करो  मुझ पे तुम कोई कृपा

      माफ़ करो भूल आप बालक की 

मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से ,

   कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन


   

तुम जिन शासन के नायक हो‌-२

   तेरी क्षमता का कोई पार नहीं 

  तुम अहिंसा व्रत के उपासक हो 

      भाव  करूणा तुझमें खूब बही।

मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से ,

   कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन




प्रभु  वैरागी छवि तेरी निराकारी

    तुम पंच महा व्रत धारी हो 

 तेरे दर्शन से ही सारे कष्ट मिटे 

     जिनेश्वर तुम अविकारी हो ।।


मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से ,

   कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन

कब मुक्ति होगी निज आतम की

      कब पद पाऊंगा मैं परमातम  





   

    

      स्वरचित:अशोक दोशी 


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