नारी शक्ति--- सरसी छन्द में
नारी शक्ति ईश स्वरूपा, रखती सबसे प्रीत। 
प्रताड़िता भी जग में होती, अधरों रखती जीत।। जोगीरा

समता, ममता, सहनशीलता, जन्मों से है साथ। 
कंधे से कंधा लग चलती, साथ चले वो पाथ।। जोगीरा

नौ रूपों का रूप सुहाना,एकल है ये नार ।
कदमों में झुकती है दुनियॉं , लेती जब अवतार।। जोगीरा

बेटी, बहना, माता, पत्नी, देती जब संस्कार। 
रिश्ते-नाते सबसे ऊपर, भर देती भंडार।। जोगीरा

झॉंसी की रानी बन लड़ती, भरती तब हुॅंकार।
दुर्गा ,काली , अंबा,माया, रचती नव संसार।। जोगीरा

मीरा सीता की श्रद्धा का, खूब करें सम्मान। 
नारी से ही स्वर्ग धरा पर, उतरे इंद्र विमान।। जोगीरा

कनक पारख 
विशाखापट्टनम
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