2 3 3849 2 3849 फिर वही सुबह फिर वही शाम फिर वही सुबह और फिर वही शाम क्या है जीवन ! क्या है मृत्यु ! क्या है इसका अंतिम मुकाम ! हंसते चेहरे रोते चेहरे कुछ गंभीर और कुछ घनेरे कुछ उलझ गये कुछ सुलझ गये कुछ अधर में ही झुलस गये करते-करते ही आराम फिर वही सुबह और फिर वही शाम...... समय का पहिया बढ़ता जाये हर पल, पल-पल चलता जाये गुजरे दिन और गुजरी रातें बीते सावन और बरसातें न ही करता है विश्राम फिर वही सुबह और फिर वही शाम...... गुजरे पल को छोड़ कर जीवन को कुछ मोड़कर आगे बढ़ तू आगे चल बदल दे तू अपना वो कल जिसके सपने देख रहा जिसको तू है खोज रहा जी ले जीवन पा ले मृत्यु यही है तेरा अंतिम मुकाम फिर वही सुबह और फिर वहीं शाम..... Label Directed by द्वारा Kapil Tiwari Shared05 Sep 2025 Start 05 Sep 2025 End 05 Sep 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Norman Sales 08-Dec-2025 Comment Like बहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ। Khushi Jain 01-Mar-2026 Comment Like बहुत बढ़िया लिखा है। Jain Mikhil 21-Jun-2026 Comment Like अत्त्युत्तम सृजन। जय हो। फिर वही सुबह फिर वही शाम © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें