2 4 6004 2 6004 उमडे हर्ष तरंग आयी ऋतु फागण की सजना, लहरे हृदय उमंग।खेलूं पिया संग मैं होली, हुलरे प्रेम तरंग।।भीगी चोली, भीगा तन मन, बाजे ढोल मृदंग।नाचे थिरक थिरक मन मेरा, उमडे नेह सुरंग।।चंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared07 Mar 2025 Start 07 Mar 2025 End 07 Mar 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Tanu Jain 17-May-2025 Comment Like अत्त्युत्तम सृजन। जय हो। Sundeep Jain 26-Jun-2025 Comment Like आप से जुड़ कर, कविता पढ़ कर बहुत अच्छा लगा!🙏❤️🙏❤️🙏 Yuvit Sonu Jain 22-Jul-2025 Comment Like सुन्दर छवि, सुन्दर प्रस्तुति Creativeinfo Demo 29-Nov-2025 Comment Like अत्युत्तम सृजन उमडे हर्ष तरंग © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें